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Nepal’s Prime Minister K P Sharma Oli Faces Revolt

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की उच्चस्तरीय बैठक छाया रहा भारत से सीमा विवाद, प्रचंड और ओली के बीच फिर से दिखा मतभेद

नेपाल ने पिछले सप्ताह संविधान संशोधन के जरिए देश के मानचित्र को दुबारा बनाने की प्रक्रिया पूरी की थी। नेपाल ने नए मानचित्र में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण भारत के तीन इलाकों लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपने इलाके में दिखाया है।

नेपाल की संसद द्वारा नए राजनीतिक मानचित्र को आम सहमति से मंजूरी दिए जाने के बाद भारत ने नेपाल के दावों को अस्वीकार करते हुए इसका बिरोध जताया था। शनिवार को नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) की 48 सदस्यीय स्थायी समिति की बैठक दौरान अधिकतर नेतायों ने नेपाल-भारत सीमा विवाद पर चर्चा की और नया मानचित्र तैयार करने के सरकार के इस कदम को ‘नेपाल की राष्ट्रीय एकता एवं संप्रभुता को मजबूती देने वाला कदम’ करार दिया।
हालांकि, उन्होंने सीमा विवाद पर भारत के साथ बाचतीच करने में सरकार की अक्षमता पर सवाल भी उठाए।

 बैठक में मौजूद रहे एनसीपी के नेता गणेश शाह के मुताबिक इस दौरान विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने यह दावा किया कि नेपाल ने भारत से कई बार सीमा के मुद्दे पर बातचीत की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद भी भारत ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।

ग्यावली ने बैठक के दौरान कहा, ‘नेपाल चाहता है कि राजनीतिक संवाद के जरिए सीमा विवाद हल हो और वार्ता के जरिये इस विषय का सामधान करने के लिये लगातार कोशिश की जाएगी।’ उन्होंने कहा कि भारत के टीवी चैनल और प्रिंट मीडिया सीमा विवाद को ज्यादा तूल दे रही है।

मंगलवार को एक बार फिर स्थायी समिति की बैठक होगी, जिसमें सीमा विवाद के अलावा नागरिकता विधेयक, कोरोना वायरस की रोकथाम और अमेरिका से मिलने वाली 50 करोड़ डॉलर के अनुदान जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

नेपाल के प्रधानमंत्री ओली भी कुछ देर लिए इस बैठक में की शिरकत

व्यस्त कार्यक्रम और स्वास्थ्य कारण से पहली दो बैठकों में प्रधानमंत्री शामिल नहीं हो पाए थे। पर शनिवार को वे कुछ देर के लिए बैठक में शामिल हुए और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर वहां से जल्दी निकल गए।

एनसीपी के एक नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री ओली की पहली दो बैठकों में अनुपस्थिति से यह प्रदर्शित होता है कि उनके और पार्टी के काय्रकारी अध्यक्ष पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के बीच मतभेद बढ़ रहे है।प्रचंड ने एक बार फिर कहा है कि सरकार और पार्टी के बीच समन्वय का अभाव है तथा वह एनसीपी द्वारा ‘एक व्यक्ति एक पद की नीति’ का पालन करने पर जोर दे रहे है।

 ओली सरकार जिस तरीके से कोविड-19 संकट से निपट रही है वह दोनों नेताओं के बीच मतभेद का एक मुख्य मुद्दा है। उल्लेखनीय है कि देश में कोविड-19 की स्थिति की निगरानी के लिये एक सर्वदलीय समिति गठित करने के प्रचंड की सलाह को को ओली अनसुना कर रहे, जिसे प्रचंड नाराज हैं।

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