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Celebrating World Environment Day 2020

विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण  2020

World Environment Day 2020…#ForNature #WorldEnvironmentDay

आज देश में स्वतंत्रता दिवस,गणतंत्र दिवस की तरह ही पर्यावरण दिवस भी एक अलग स्थान रखता है। एक वह दिन जिसे हम अपनी आजादी के लिए याद करते हैं,और एक वह दिन जिस दिन हम अपने जीवन दान देने की लिए सुक्रिया करते हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए पूरे विश्व में मनाया जाता है। विश्व पर्यावरण दिवस को मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र ने पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक जागृति लाने हेतु वर्ष 1972 में की थी, जहां इसे 5 जून से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन में चर्चा के बाद शुरू किया गया था और 5 जून 1974 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया।

भारत सरकार ने भी 1976 में संविधान में संशोधन कर नए अनुच्छेद जोड़े थे जिसमे 48A तथा 51A (G ), अनुच्छेद थें। अनुच्छेद 48 सरकार को निर्देश देता है कि वह पर्यावरण की सुरक्षा करें और उनमें सुधार का काम करें और अनुच्छेद 51 A (G )नागरिकों के लिए है कि वह हमारे पर्यावरण की रक्षा करें।
लेकिन आज यह नियम बस कागजों के पन्नों में रह गए है।

अपने पर्यावरण को बचाने के लिए कई लोगों ने आंदोलन किए, कई अभियान चलाएं उनमें से एक चिपको आन्दोलन भी एक पर्यावरण-रक्षा के आन्दोलन का सबसे बड़ा उदाहरण था ,जो उत्तराखण्ड के चमोली में किसानो ने वृक्षों की कटाई का विरोध करने के लिए किया था। वे राज्य के वन विभाग के ठेकेदारों द्वारा वनों की कटाई का विरोध कर रहे थे और उन पर अपना परम्परागत अधिकार जता रहे थे। उस समय कई महिलाओं ने अपने प्राण तक का बलिदान देना स्वीकार किया पेड़ो की कटाई को रोकने के लिए। लेकिन हम अंधाधुन पेड़ो की कटाई करते जा रहे है ,लोग जंगलों को नष्ट कर शहरीकरण की ओर बढ़ रहे हैं और अपने स्वार्थ में यह नहीं देख पा रहे है कि पेड़ पौधों को काट कर हम रहने के लिए इमारतें तो बना ले रहें हैं, बड़ी बड़ी ओद्योगिक कंपिनयां भी बना ले रहे है लेकिन जीने के लिए, शुद्ध हवा में लेने के लिए हमे इन पेड़ पौधों पर भी निर्भर होना पड़ेगा।
पर्यावरण का अर्थ,‘परी+आवरण’ यानी हमारे आस पास जो भी वस्तुएं हैं,जो हमारे जीवन को प्रभावित करती हैं, वे सभी पर्यावरण से बनती हैं। जल, हवा, जंगल, और अन्य जीव जंतु ये सभी हमारे पर्यावरण के ही अभिन्न अंग हैं।

प्रकृति जो हमें जीने के लिए स्वच्छ वायु, पीने के लिए साफ जल और खाने के लिए फल-फूल उपलब्ध कराती रही है आज वही संकट में है। आज उसकी सुरक्षा का सवाल उठ खड़ा हुआ है।
आज भारत का केवल लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा ही जंगल बचा है और आज हम इस से जल प्रदूषण ,वायु प्रदुषण ,ध्वनि प्रदूषण ऐसी कई समस्यों से जूझते जा रहे हैं। आज जंगलों की कटाई से नदियां सूखती जा रही है, कई जानवर लुप्त होते जा रहें हैं।
पिछले 3 सालों से देश की राजधानी दिल्ली की स्थिति नवंबर से लेकर जनवरी तक के महीने में इतनी बत्तर हो चुकी थी। यहां रहने वाले लोगों को सांस और भी कई तरह की बीमारियों से ग्रसित होने लगे थें, वायु के गुणवत्ता इतनी गिर चुकी थी कि जल्दी कोई व्यक्ति घर से बाहर नहीं निकल रहा था। आखिर ऐसा हुआ क्यों?

इसका जवाब हमारे पास ही है। नए उपकरणों, एसी,फ्रिज,ओर गाड़ी से निकलने वाले गैस और जहरीले धुएं से आज हमें बचाने के लिए ना ही वो जंगल हैं और ना ही पेड़।
इसलिए अगर जीना है तो पेड़ भी अवश्य लगाने पड़ेंगे ताकी शुद्ध वायु मिल सके।
एक वृक्ष पर्यावरण दिवस के नाम अवश्य लगाए।

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