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Hockey legend Balbir Singh hospitalized – भारत को तीन बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलाने वाले और पहले पद्मश्री विजेता पूर्व हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर आईसीयू में भर्ती।

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भारत को तीन बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलाने वाले और पहले पद्मश्री विजेता पूर्व हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर आईसीयू में भर्ती।

तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य एबं महान हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर की तबीयत बिगड़ने कारण उन्हें मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि कल शाम उनकी तबीयत अचानक खराब हुई उसके बाद उन्हें फोर्टिस में भर्ती कराया गया। जहां वह आईसीयू में है और अभी भी उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

95 वर्षीय बलवीर सिंह जी को कई समय से स्वास संबंधी बीमारी थी, इसी संबंध में उन्हें पिछले साल कई दिनों तक चंडीगढ़ में भर्ती रहना पड़ा था।

पारिवारिक सूत्रों ने बताया की पिछले दो-तीन दिन से उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी जिसका असर उनके विभिन्न अंगो पर पड़ रहा था।

बलबीर सिंह ने लंदन (1948) हेलसिंकी (1952) और मेलबोर्न (1956) ओलंपिक में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। हेलसिंकी ओलंपिक में उन्होंने पांच गोल किए थे जो कि अब तक एक विश्व रिकॉर्ड है। जिसकी बदौलत भारत को 6-1 से जीत मिली थी। हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले ध्यानचंद भी इसी टीम के सदस्य थे।

1975 के विश्व विजेता भारतीय टीम के मैनेजर और मुख्य कोच भी रहे।

1971 में उनके कोच रहते हैं भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने विश्व कप में कांस्य पदक जीता था ।

उनके इसी जज्बे और सफलता को देखते हुए भारतीय सरकार ने 1957 में उन्हे पद्मश्री से नवाजा,वे वैसे पहले खिलाड़ी बने जिन्हें पद्मश्री मिला।

डोमिनियन रिपब्लिक द्वारा जारी किए गए एक डाक टिकट पर बलबीर सिंह सीनियर और गुरुदेव सिंह थे। यह डाक टिकट 1956 के मेलबर्न ओलंपिक के सम्मान में जारी किया गया था। उन्हें वर्ष 2006 में सबसे अच्छा सिख खिलाड़ी घोषित किया गया । बलबीर सिंह जी को 2012 के लंदन ओपेरा हाउस में सम्मानित किया गया।

बलबीर सिंह सीनियर को उन 16 महान खिलाड़ियों में शामिल किया गया है जिन्हें मनुष्य की ताकत, मजबूत कोशिश ,जुनून ,मेहनत ,लग्न और उपलब्धियों के लिए जाना जाता है।

वर्ष 2015 में उन्हें मेजर ध्यानचंद लाइफ अचीवमेंट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।

अगर ये कहा जाए कि हॉकी और बलवीर सिंह एक दूसरे के पर्याय थे तोह बिल्कुल भी सयोक्ति नही होगा।बलवीर सिंह जी के लिए हॉकी उनकी जिंदगी थी या जिंदगी ही हॉकी थी। जब तक थी वह देश और भारतीय हाकी के लिए कुछ कर सकते थे उन्होंने किया वो हमेशा ही इस खेल से जुड़े रहे हैं।

अतः ईश्वर से प्रार्थना है कि वह जल्द से जल्द स्वस्थ हो कर अपने घर लौटें।

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