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Irrfan Khan passes away at 53 – नही रहे बोलती आंखो के अभिनेता इरफान खान।

बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक में अपनी एक्टिंग की छाप छोड़ने वाले इरफान पिछले कुछ सालों में सुपरस्टारडम हासिल करने में कामयाब रहे।अपनी बहुमुखी प्रतिभा से सबका दिल जीतने वाले अभिनेता कैंसर से अपनी जिंदगी हार गए।विगत मंगल वार को कैसर बीमारी की वजह से इरफान खान का मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इरफ़ान खान लंबे समय से बीमार चल रहे थे। वर्ष 2018 को  इरफ़ान खान ने अपने चाहने वालों को अपनी बीमारी के बारे में बताया था और यह भी कहा था कि जल्द ही वापस ठीक हो कर आएंगे । कुछ समय पहले वह अपने इलाज़ के लिए लंदन भी गए थे। उसके बाद उनके हालत में कुछ सुधार आया था। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद एक बार फिर तबीयत ख़राब होने पर उन्हें कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उन्होंने अपनी आखिरी सांसे लीं।

वैसे कम ही लोगों को मालूम है कि इरफान खान का पूरा नाम साहबजादे इरफान अली खान था। वे राजस्थान के रॉयल फैमिली से ताल्लुक रखते थें लेकिन उन्होंने अपने नाम से साहबजादे अपने सुरुआती दिनों में ही अलग कर लिया था। इरफ़ान खान की खाश रुचि हमेशा क्रिकेट में रही थी और वो क्रिकेटर भी बनना चाहते थें लेकिन इरफ़ान खान के माता पिता नहीं। अपनी पढ़ाई राजस्थान से पूरी करने के बाद इरफ़ान खान ने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला ली जहां से उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

अपनी पहली फिल्म से छा गए थे इरफान खान।इरफान खान के करियर की बात करें तो उनकी पहली फिल्म सलाम बॉम्बे थी. जो कि साल 1988 में रिलीज हुई थी.इस से पहले उन्होंने अपना करियर टीवी से शुरू किया था. सलाम बॉम्बे इरफ़ान खान की पहली फिल्म थी जिस से   इरफान खान ने अपनी एक्टिंग का लोहा पूरी दुनिया में  मनवा लिया था. मीरा नायर के निर्देशन में बनी इस फिल्म इरफान खान ने लेटर राइटर का रोल अदा किया था. और इस फिल्म को फिल्म एकेडमी अवॉर्ड में बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म के लिए नॉमिनेशन मिला था. इसके साथ साथ इस फिल्म को देश विदेश में भी कई सारे अवॉर्ड मिले थे.इरफान खान ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक रोल किए। गंभीर रोल हो या कॉमेडी, इरफान ने हर रोल बखूबी निभाया और लोगों के दिल पर अपनी छाप छोड़ी। 

इरफान खान ने अपने करियर में बॉलीवुड की कई सुपरहिट फिल्में दी थीं. जिनमें हासिल, कसूर, पीकू, द नेमसेक, गुमनाम, गुनाहर, कसूर, रोग, लाइफ ऑफ पाई, हिंदी मीडियम, ब्लैकमेल, कारवां, पान सिंह तोमर, करीब करीब सिंगल, स्लमडॉग मिलियनेयर जैसी कई फिल्में शामिल वहीं वालीवुड में भी इरफ़ान खान ने द अमेजिंग स्पाइडर मैन, इन्फ्रेनो जौरसिक वर्ल्ड  जैसी कई बेहतरीन फिल्में भी हैं।इरफ़ान खान ने कई टीवी शोज में भी काम किया जिसमें चंद्रकांता ,मानो या ना मानो ,बहता सागर ओर भी कई हैं ।

मेरे बचपन की एक याद हमेशा इरफ़ान खान से जुड़ी है जब भी मैं हच सिमकार्ड के टॉक टाइम ,या किसी प्रचार में इरफ़ान खान को देखती थी तो मुझे यही लगता था कि ये आदमी ऐसे क्यों बोलता है, इतना सीरियस क्यों दिखता है  बात उन दिनों की हो या आज की टीवी के प्रचार में कोई भी एक्टर इतना शांत और साधारण नहीं दिखते हैं। तब शायद मुझे एक्टिंग के बारे में कोई खास जानकारी नहीं थी , लेकिन जब मैंने सलाम बॉम्बे, लाइफ ऑफ पाई हो या फिर तलवार,हो या हिंदी मीडियम हर फिल्मों में इनकी अभिनय देखी तब मुझे लगा कि इनके अभिनय में हमेशा सब से अलग छवि है।

अंतिम फिल्म…..इरफ़ान खान की अंतिम फिल्म इंग्लिश मीडियम ,जो कि 13 मार्च को रिलीज हुई थी, लेकिन covid 19 की वज़ह से ज्यादा दिन सिनेमा घरों में रह नहीं पाई। इस फिल्म में भी इस बेहतरीन अभिनेता ने एक पिता का किरदार निभाया है जो खुद तो पढ़ा लिखा नहीं है लेकिन अपनी बेटी की इक्छाओं और पढ़ाई के लिए विदेश तक जाता है। इस फिल्म के प्रमोशन में इरफ़ान खान नहीं आ पाए थे क्यों की उस समय वो लंदन में अपना इलाज करवा रहे थे लेकिन तब शायद किसी को नहीं पता था कि यह इनकी आखरी फिल्म होगी।

आज इस बेहतर और जिंदादिल अभिनेता के निधन से फिल्म जगत को काफी नुकसान पहुंचा है क्यों कि हर किसी में हर तरह के रोल करने की खूबी नहीं होती ,लेकिन इरफ़ान खान में शायद वो सारी खूबियां थीं जो एक अभिनेता के अभिनय को लोगो के दिलो में हमेशा जिन्दा रखता हैं।
अलविदा इरफ़ान खान……

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