मंगलवार, जनवरी 18Digitalwomen.news

एक नजर जरा बिहारियों पर भी…..


25 मार्च से पूरे भारत में लॉक डाउन है, जिस तरह पूरा विश्व आज covid 19 के संक्रमण से जूझ रहा है ,भारत भी  ऐसी ही परिस्थितियों का सामना कर रहा है। आज लॉक डाउन के 32 दिन हो चुके हैं और लॉक डाउन जारी है। सरकार ने इस महामारी से बचने के लिए लॉक डाउन के नियम।को लागू किया क्यों की अभी तक इस वायरस के मरीज का कोई इलाज सामने नहीं आया है और ना ही कोई उपाय सिवाए सोशल डिस्टेसिंग के। आज लोग काफी परेशान हैं क्यों कि वो अपने घर से निकल नहीं पा रहें लेकिन सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना मजदूरों और विद्यार्थियों को करना पड़ रहा है जो एक तो अपनी रोजी रोजगार के लिए अपने राज्य से दूसरे राज्य जाते हैं और जो बेहतर शिक्षा के लिए अपने माता पिता,या परिवार को छोड़ कर जाते हैं। आज इनकी स्थिति ऐसी बनी है कि को भी इनकी परेशानी को सुन ने वाला नहीं है।

बिहार,उत्तरप्रदेश, राजस्थान छत्तीसगढ़,हरियाणा ,पंजाब से कई मजदूर अपने रोजगार के लिए देश की राजधानी दिल्ली आते हैं ताकि उन्हें बेहतर रोजगार मिल सके और वो अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें ,वहीं शिक्षा के क्षेत्र मे एसीएचआईआई पढ़ाई के लिए, आईआईटी की तैयारी हो या मेडिकल की, हर साल लगभग डेढ़ से दो लाख छात्र-छात्राएं कोटा का रुख करते हैैं वो आज सब लॉक डाउन की वज़ह से फसे पड़े हैं और स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि उनकी परेशानियों को कोई नहीं सुन ने वाला है।

इस लॉक डाउन के दौरान कई हजार मजदूर दिल्ली से अपने अपने राज्यों कि ओर पदैल रुख करना सुरू कर दिया था, क्यों की उनके पास ना तो कोई रोजगार था ना ही कमाने का अन्य को साधन। पेट की आग और अपने घर जाने की लालशा में लोग कुछ भी करने के लिए तैयार थें। लेकिन एक स्थान से दूसरे स्थान जाना, या एक राज्य से दूसरे राज्य में जाना लॉक डाउन के नियमों का उलंघन है इस वजह से कई हजार मजदूर अपने अपने राज्य नहीं जा पाएं हैं। लेकिन कई राज्य सरकार ने अपने अपने राज्यों के मजदूरों ओर विद्यार्थियों को लाने लिए बस सुविधाओं की शुरुआत की थीं ताकि जो मजदूर फसे है वो अपने राज्य में वापस आ जाएं। कई राज्य सरकार ने पूरी ऐतिहात के साथ अपने मजदूरों और विद्यार्थियों को वापस लाने में सफल रहा है।वहीं हम बात करें बिहार की जहां से सबसे ज्यादा संख्या में मजदूर हो या विद्यार्थी वो दूसरे राज्यों में आते हैं।इस लॉक डाउन के दौरान कई हजार मजदूर बिहार से बाहर फसे हैं वहीं लगभग 10 हजार विहार के स्टूडेंट्स भी  कोटा में फसे हैं जो लगातार वीडियो के जरिए अपनी बात कह रहे हैं और बिहार वापस आने की मांग कर रहें हैं लेकिन मुख्यमंत्री साहब इनकी बातों को अनसुना करते नजर आ रहें हैं।

बिहार के बच्चों द्वारा लगातार आग्रह करने के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई तो इन लोगों ने गांधीवादी तरीका अपना लिया है। उपवास के जरिए ये छात्र बिहार सरकार से अपील कर रहे हैं कि उन्हें भी दूसरे राज्यों के बच्चों की तरह कोटा से निकालकर घर पहुंचाया जाए लेकिन इसका भी को असर नहीं दिख रहा। बिहार के बच्चों कि मांग यह है कि जिस तरह छत्तीगढ़, मध्यप्रदेश अपने अपने राज्यों के बच्चों को वापस ला रही है बिहार सरकार भी लाये।लेकिन आज प्रधानमंत्री के साथ हुए राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग में बिहार के सुशासन बाबू के यह साफ कह दिया है कि वो दूसरे राज्यों से लोगों को लाकर किसी तरह का खतरा मोल नहीं लेना चाहते ,लेकिन सवाल यह है आखिर यह जो मजदूर फसे है इनकी परेशानी सुनेगा कौन?बिगत पंद्रह वर्षों में आपको और आपकी पार्टी की बिहार की जनता सरकार बनाने का मौका दिया है आपने उन्हें रोजगार और शिक्षा के रूप में क्या दिया??क्यों अब भी कई हजार मजदूर हर साल दूसरे राज्य कमाने जाते हैं ,जब बेहतर सुविधा होती या अच्छा रोजगार होता तो क्या वो बिहार से बाहर अपने परिवार को छोड़ कर जाने के लिए मजबूर होते?माना कि कोरोना काफी घातक है,संक्रमण का खतरा भी काफी अधिक है लेकिन अपने राज्य के लोगों की जिम्मेवारी भी आपकी है वो लोग भी आपके ही हैं जरा एक नजर इनकी भी परेशानियों पर डाल लें , क्यों की ये हैं तो ही आप हैं और चुनाव भी बस नजदीक ही है।

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